नालागढ़, 10 अगस्त,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा।
हिमाचल किसान सभा,सीटू, एटक, और इंटक के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को नालागढ़ में किसानों और मजदूरों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। रैली में ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और बड़ी संख्या में मिड-डे मील (MDM) वर्करों ने भाग लिया।
प्रदर्शन की शुरुआत पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से हुई। रैली नालागढ़ बाजार से होकर एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
जनसभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा की हिमाचल प्रदेश इकाई के महासचिव नरेश घई ने कहा कि किसान और मजदूर दोनों अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमाफी, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा और चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि किसान-मजदूर एकता को मजबूत कर जनविरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखा जाएगा।
सभा में अन्य वक्ताओं ने महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और श्रमिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।
प्रदर्शनकारियों ने सभी श्रमिकों के लिए ₹42,000 मासिक न्यूनतम वेतन, मनरेगा में 200 दिन रोजगार व ₹700 प्रतिदिन मजदूरी, एमडीएम, आंगनवाड़ी और आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, सामाजिक सुरक्षा तथा किसानों की जमीन को कॉरपोरेट कब्जे से बचाने जैसी मांगें भी रखीं।
प्रदर्शन में एमडीएम वर्करों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। उन्होंने सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग दोहराई।
सभा को हिमाचल प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष रवि शर्मा, एआईकेएस के उपाध्यक्ष यशपाल, इंटक जिला अध्यक्ष श्याम लाल ठाकुर, एटक नालागढ़ अध्यक्ष मोहन लाल, नछत्तर सिंह, सीटू महासचिव मोहित वर्मा तथा अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने किसान-मजदूरों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।







