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PGIMER में ट्रॉमा लाइफ सेविंग स्किल्स पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप

चंडीगढ़, 4 अक्तूबर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ में 22वें वार्षिक जोनल सम्मेलन NZISACON के दौरान ट्रॉमा मरीजों की जान बचाने से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। राष्ट्रीय ट्रॉमा एवं बर्न इंजरी रोकथाम एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NPPMT&BI), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘इमीडिएट ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (ITLS)’ रहा।

एनेस्थीसिया एवं इंटेंसिव केयर विभाग की ट्रॉमा एनेस्थीसिया सब-स्पेशियलिटी के विशेषज्ञों ने युवा चिकित्सकों को ट्रॉमा के गोल्डन ऑवर में किए जाने वाले समयबद्ध और जीवनरक्षक हस्तक्षेपों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।


विभागाध्यक्ष एवं DM ट्रॉमा एनेस्थीसिया एंड एक्यूट केयर की कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. (डॉ.) काजल जैन ने जीवनरक्षक हस्तक्षेपों के एल्गोरिदमिक दृष्टिकोण में हुए हालिया बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने ट्रॉमा मरीजों के बेहतर उपचार परिणामों के लिए तेज प्रतिक्रिया देने वाली मजबूत और बहु-विषयक टीमों के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया।

वर्कशॉप में डॉ. सुमन अरोड़ा, डॉ. शुभजीत तालुकदार, डॉ. अमरज्योति हजारिका और डॉ. निधि भाटिया ने वेट मॉडल पर रैपिड इंट्रावेनस एक्सेस और चेस्ट ट्यूब डालने की लाइव मास्टर डेमोंस्ट्रेशन दी। प्रतिभागियों को इन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

वैज्ञानिक सत्रों में ट्रॉमा रिससिटेशन के दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया—अत्यधिक रक्तस्राव को तत्काल नियंत्रित कर मरीज की जान बचाना तथा वायुमार्ग में रुकावट को शीघ्र दूर कर शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाना।

कार्यशाला में जनरल सर्जरी, ओरल हेल्थ साइंसेज तथा हाल ही में शामिल हुए एनेस्थीसिया रेजिडेंट्स सहित विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञ फैकल्टी ने प्रतिभागियों को आपातकालीन ट्रॉमा देखभाल से जुड़ी आवश्यक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।

प्रतिभागियों ने कार्यशाला की व्यावहारिक उपयोगिता और आपातकालीन ट्रॉमा उपचार के लिए इसकी प्रासंगिकता की सराहना की।