/सेब सड़ने पर मदद करने की बजाय पुलिस से धमकी दिलवाना शर्मनाक-जयराम ठाकुर

सेब सड़ने पर मदद करने की बजाय पुलिस से धमकी दिलवाना शर्मनाक-जयराम ठाकुर

बागवानों को धमकाने की बजाय सेब ख़रीद के कांटे और सेंटर खोले सरकार

शिमला 31 जुलाई,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/ नयना वर्मा

बागवानों की फसलें मंडियों तक पहुँचाने का इंतज़ाम करे सरकार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा के तीन हफ़्ते बाद भी सरकार सड़कें खोलने में नाकाम रही जिसके कारण बाग़वानों के सेब सड़ गये। मजबूरन बागवान को सेब बहाने पड़े। सरकार को सेब सड़ने पर बागवान की मदद करने के बजाय उसे थाने तालाब कर रही है। पुलिस से धमकी दिलवा रही है कि सेब को क्यों फेंके। उन्होंने कहा कि यह नये तरह कि व्यवस्था है जहां सरकार की नाकामी की ज़िम्मेदारी भी पीड़ित पर डालकर उसे धमकाया जा रहा है। यह बहुत शर्मनाक कृत्य है। आपदा प्रभावित को राहत देने के बजाय धमकी देने की व्यवस्था आज तक कहीं नहीं दिखी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस तरह के कृत्य को वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार के लोग आपदा से प्रभावित असली जगह अभी पहुंचे ही नहीं हैं, लोगों को किस-किस तरह की समस्याएं हैं, सरकार यह जान ही नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की आपदा राहत की हक़ीक़त यह है कि अभी तक अपना आशियाना गंवाने वालों को एक तिरपाल तक नहीं दे पाई है। सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा में सिर्फ़ एक जगह जेसीबी मशीन सड़कों को सही करने में लगी दिखी। इस तरह से अगर काम हुआ तो सेब का सीजन बीत जाएगा और सड़कें नहीं खुलेंगी। उन्होंने कहा कि बागवानों को धमकाने के बजाय सरकार एचपीएमसी के सेब ख़रीद सेंटर खोलने और कांटे लगाने पर काम करें। हम सरकार की यह तानाशाही चलने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस आपदा में मेहनत से प्रदेश की आर्थिकी मेन योगदान देने वाले बागवानों को राजनीति का हिस्सा न बनाए तो बेहतर होगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बीते कल मैं शिमला के जुब्बल-कोटखाई और रोहड़ू के इलाक़े में गया था। वहां बगीचों को भी बहुत नुक़सान हुआ है। लोगों के सैंकड़ों पेड़ नष्ट हो गये हैं। सड़कें पूरी तरह बंद है। आपदा को तीन हफ़्ते बीत चुके हैं। मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड होने के बाद भी सरकार सड़कों को बहाल नहीं कर पाई है। इस वजह से यातायात पूरी तरह से ठप है। सड़कें बर्बाद होने की वजह से बाग़वान सेब को मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। साल भर के खून पसीनें की कमाई खेतों में सड़ रही है। मजबूर होकर लोग उसे बहा रहे हैं। यहां सवाल तो सरकार से पूछे जाने चाहिए कि सड़कें क्यों नहीं बहाल हुई लेकिन यहां बाग़वानों को ही परेशान किया जा रहा है कि उसने सेब को नाले में क्यों फेंका। सेब नाले में फेंकते वक़्त उसका वीडियो कैसे बना। अब उस युवक को पुलिस द्वारा डराया धमकाया जा रहा है, उस पर दबाव डाला जा रहा है। यह बहुत ग़लत परंपरा है।