चंडीगढ़, 28 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो /वर्मा।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी एवं मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने रविवार को क्रॉनिक मायलॉयड ल्यूकेमिया (CML) सर्वाइवर डे का आयोजन ज़ाकिर हॉल में किया। कार्यक्रम में 600 से अधिक मरीजों और उनके परिजनों ने भाग लिया।
संस्थान हर महीने लगभग 500 सीएमएल मरीजों का प्रबंधन करता है, जबकि करीब 5,000 मरीज नियमित उपचार व फॉलोअप में रहते हैं। कभी 2–3 वर्ष की ही आयु देने वाला यह रोग वर्ष 2001 में इमैटिनिब (मैजिक बुलेट) के आने के बाद अब एक प्रबंधनीय बीमारी बन चुका है। नियमित दवा और देखभाल से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी रहे हैं।

कार्यक्रम में 1989 से सीएमएल से जूझ रहे सबसे पुराने मरीज ने भी भाग लिया और अपनी सकारात्मक जीवन यात्रा साझा की।
इस अवसर पर देखभाल करने वालों (केयरगिवर्स) की भूमिका पर जोर दिया गया। सुश्री प्रियंका कुबल ने केयरगिवर्स की दोहरी जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। सुश्री बीना नारायणन (कंट्री हेड, मैक्स फाउंडेशन इंडिया), सुश्री उर्वशी (मैक्स फाउंडेशन), सुश्री रेनु सैगल और सुश्री दमन (सहायता) ने भी मरीजों और परिजनों को निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।

इस मौके पर विशेषज्ञ पैनल — डॉ. सुभाष वर्मा, डॉ. नीला वर्मा, डॉ. अल्का खदवाल, डॉ. गौरव प्रकाश, डॉ. अरिहंत जैन, डॉ. शानो नसीम, डॉ. आदित्य जांडियाल और डॉ. चरनप्रीत सिंह — ने मरीजों के सवालों के जवाब दिए। यह सत्र प्रो. पंकज मल्होत्रा ने संचालित किया।
पीजीआईएमईआर निदेशक डॉ. विवेक लाल ने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध होने और जनरिक दवाओं की प्रभावशीलता की सराहना की।

सीएमएल सर्वाइवर डे वैज्ञानिक प्रगति, मरीजों की हिम्मत और सामूहिक सहयोग का प्रतीक है, जिसने कभी जानलेवा समझे जाने वाले रोग को अब एक दीर्घकालिक प्रबंधनीय स्थिति बना दिया है।








