शुद्धता, वैदिक विधि और योग्य आचार्यों को प्राथमिकता देने की अपील
नालागढ़ 6 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
सोशल मीडिया के दौर में यज्ञ, अनुष्ठान और जप के नाम पर बढ़ते दिखावे पर शास्त्री सोहन लाल शर्मा ने तीखी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि आज कई स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान तपस्या और साधना के बजाय प्रदर्शन का रूप लेते जा रहे हैं, जिससे कर्मकांड की मूल भावना प्रभावित हो रही है।
उन्होंने अशुद्ध अथवा मिलावटी सामग्री के प्रयोग, वेदमंत्रों के गलत उच्चारण, शास्त्रोक्त विधि के बिना यज्ञ वेदी निर्माण, अनुष्ठान के दौरान मोबाइल और फोटो-वीडियो में व्यस्त रहने तथा बिना पर्याप्त ज्ञान के ग्रह शांति जैसे कर्मकांड कराने पर सवाल उठाए।
शास्त्री सोहन लाल शर्मा ने कर्मकांड में कथित ठेकेदारी प्रथा पर भी चिंता जताते हुए कहा कि कई बार योग्य वैदिक विद्वानों को अवसर नहीं मिलता, जबकि कम ज्ञान रखने वाले लोग बड़े आयोजनों की जिम्मेदारी ले लेते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरुकुलों में वर्षों तक वेद एवं वैदिक कर्मकांड का अध्ययन करने वाले योग्य विद्वानों की उपेक्षा समाज के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल पंडितों को दोष देना उचित नहीं है, बल्कि यजमानों को भी आत्ममंथन करना होगा। समाज को दिखावे और भव्यता के बजाय शुद्ध, सात्विक और विधिपूर्वक वैदिक कर्मकांड को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शास्त्री सोहन लाल शर्मा ने समाज से आग्रह किया कि धार्मिक आयोजनों में योग्य एवं विद्वान आचार्यों का चयन करें और कर्मकांड को प्रदर्शन नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और साधना के रूप में अपनाएं








